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1. सरकार ने केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग की स्‍थापना कब और क्‍यों की ?

सतर्कता के क्षेत्र में केन्‍द्रीय सरकारी एजेंसिस को सलाह तथा मार्गदर्शन देने हेतु, श्री के संथानम की अध्‍यक्षता वाली भ्रष्टाचार निवारण समिति की सिफारिशों पर सरकार ने फरवरी,1964 में केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग की स्‍थापना की।

2. केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग की पृष्‍ठभूमि क्‍या है ?

केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग की अवधारणा एक शीर्षस्‍थ सतर्कता संस्‍थान के रूप में की गई है जो किसी भी कार्यकारी प्राधिकारी के नियंत्रण से मुक्‍त है तथा केन्‍द्रीय सरकार के अन्‍तर्गत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है एवं केन्‍द्रीय सरकारी संगठनों में विभिन्‍न प्राधिकारियों को उनके सतर्कता कार्यों की योजना बनाने, निष्‍पादन करने, समीक्षा करने तथा सुधार करने में सलाह देता है।

राष्‍ट्रपति द्वारा एक अध्‍यादेश जारी किए जाने के फलस्‍वरूप केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग को 25 अगस्‍त, 1988 को ‘’सांविधिक दर्जा’’ देकर एक बहुसदस्‍यीय आयोग बनाया गया है।

3. केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग का वर्तमान दर्जा क्‍या है ?

केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग विधेयक, संसद के दोनों सदनों द्वारा वर्ष 2003 में पास किया गया तथा राष्‍ट्रपति ने 11 सितम्‍बर, 2003 को इस विधेयक को स्‍वीकृति दी। इस‍ प्रकार, केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 (2003 की संख्‍या 45) उसी तिथि से प्रभावी हुआ।

आयोग की संरचना निम्‍न है :

·        एक केन्‍द्रीय सतर्कता आयुक्‍त                        - अध्‍यक्ष

·        सतर्कता आयुक्‍त जिनकी संख्‍या दो से अधिक नहीं होगी  - सदस्‍य

 

अप्रैल, 2004 के ‘’लोकहित प्रकटीकरण एवं मुखबिर संरक्षण’’ पर भारत सरकार के संकल्‍प द्वारा भारत सरकार ने भ्रष्‍टाचार के किसी भी आरोप को प्रकट करने अथवा कार्यालय का दुरूपयोग करने सम्‍बन्धित लिखित शिकायतें प्राप्‍त करने तथा उचित कार्रवाई की सिफारिश करने वाली एक ‘’नामित एजेंसी’’ के रूप में केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग को प्राधिकृत किया है।